मकर संक्रांति की जानकारी (तथ्य) (आध्यात्मिक, धार्मिक, महत्व) (विशेषता) | Makar Sankranti information (facts) (spiritual, religious, significance) (importance) (specialty) in Hindi

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मकर संक्रांति की जानकारी (तथ्य) (आध्यात्मिक, धार्मिक, महत्व) (विशेषता) | Makar Sankranti information (facts) (spiritual, religious, significance) (importance) (specialty) in Hindi” के बारे में जानने के लिए आगे बढ़ने से पहले, आइए कुछ बुनियादी जानकारी जानते हैं।

मकर संक्रांति: आइए, सबसे पहले हम समझते हैं कि ‘मकर संक्रांति’ शब्द का अर्थ क्या है।  

‘मकर’, ‘राशियों’ में से एक है और ‘संक्रांति या संक्रमण’ का अर्थ है श्री सूर्य देव का चलन। अर्थात श्री सूर्य देव ‘धनुर राशी’ से ‘मकर राशी’ में प्रवेश करते इसको संक्रमण कहते हैं। 

यहां संक्रांति / संक्रमण का अर्थ है एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना । संक्रमण = सं + क्रमण। यहां क्रमण का अर्थ है चलन।

अगर धनुर राशी से मकर राशी में प्रवेश होने का सूर्य देव का यह कार्य, यदि सूर्योदय के समय पर नहीं होता है, तो इसे मकर संक्रांति का उत्सव नहीं माना जाना चाहिए।

जिस दिन श्री सूर्य देव धनुर राशी से मकर राशी में प्रवेश करते हैं, उस दिन यदि यह चलन भारतीय पंचांग के अनुसार ‘सूर्योदय’ के समय पर नहीं होता है तो, हम इसे उत्सव के दिन के रूप में नहीं मान सकते। 

भारतीय संस्कार के अनुसार अगर सूर्योदय के समय कुछ होता है, तो ही हम इसे एक शुभ अवसर और सही अवसर मानते हैं। 

सूर्योदय समय के दौरान, अभी भी श्री सूर्य देव मकर राशी की ओर बढ़ रहे हैं और इस प्रकार सूर्योदय होने पर ही सभी को ‘मकर संक्रांति या मकर संक्रमण’ मनानी चाहिए ।

(शायद अगले दिन – कृपया इस बारे में जानने के लिए अपने स्थानीय पंडित से सलाह लें)।

भारत के अलावा, मकर संक्रांति कुछ अन्य देशों में भी मनाई जाती है।

1. नेपाल, इसे अपने पंचांग के अनुसार जनवरी में ‘माघे संक्रांति’ के रूप में मनाता है, जो कि माघ महीने की शुरुआत और पौष महीने के अंत में आता है।

2. पारंपरिक थाई नव वर्ष दिवस ‘सांगक्रान’ को संक्रांति शब्द से लिया गया है।

3. म्यांमार में ‘थिंग्यान’, लाओस में ‘पी मा लाओ’ और कंबोडिया में ‘मोह सांगक्रान’ भी अपनी-अपनी संस्कृतियों में संक्रांति के अलग-अलग रूप हैं।

मूल रूप से संक्रांति के दिन, यहां क्या होता है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है, गोलार्ध जो सर्दियों का अनुभव करते हुए, सूर्य से दूर था, अब गर्मियों की शुरुआत को संकेत करते हुए, सूर्य के सामने होगा। 

किसानों के लिए, यह एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि यह लंबी सर्दियों के अंत और गर्मियों की शुरुआत और एक नए फसल के मौसम का प्रतीक है। 

हिंदू मान्यता के अनुसार, सूर्य की दक्षिणायण (दक्षिणी यात्रा) यहां समाप्त होती है, और यह उत्तरायण (उत्तरी यात्रा) कर्क रेखा की ओर शुरू होती है। 

यही कारण हो सकता है कि अन्य हिंदू उत्सवों के विपरीत, संक्रांति आमतौर पर एक निश्चित तारीख 14 जनवरी या 15 जनवरी को पड़ती है। 

एक और कारक यह है कि संक्रांति एक अशुभ चरण के अंत का संकेत देती है (कभी-कभी दिसंबर के मध्य में), और इसे शुरुआत का शुभ मुहूर्त माना जाता है ।

महाभारत में भीष्म का निधन उत्तरायण में हुआ था, और इसलिए इसका धार्मिक महत्व भी है। 

जबकि यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित अधिकतर भारतीय राज्यों में मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, अन्य राज्यों में मामूलीसी क्षेत्रीय विविधताएं हैं। 

तमिल लोग इसे ‘ताइ पोंगल’ के रूप में मनाते हैं, जबकि गुजराती इसे ‘उत्तरायण’ के रूप में मनाते हैं। 

पंजाब, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा में इसे ‘माघी’ के रूप में मनाया जाता है, जबकि असमियों के लिए यह ‘भोगली बिहू’ है। 

कश्मीर में इसे ‘शिशुर सेंक्रात’ कहा जाता है, और कर्नाटक इसे ‘मकर संक्रमण’ के रूप में देखता है।

मकर संक्रांति के दिन का अन्य महत्व:

1. आज वह दिन है जब श्री भीष्म ने अंतिम रूप से तय किया कि श्री कुरुक्षेत्र केयुद्ध के बाद उन्हें अपना जीवन त्याग देना चाहिए |

(ऐसा वह इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें विश्वास हो जाता है कि हस्तिनापुर श्री युधिष्ठिर के हाथों में सुरक्षित है |)

2. संक्रांति वह दिन है जब श्री सूर्यदेव ‘दक्षिणायण’ (दक्षिण) से ‘उत्तारायण’ (उत्तर) की ओर बढ़ते हैं।

3. संक्रांति वह दिन है,जब देवतागणों का दिन शुरू होता है।

देवतागणों के लिए उनके ग्रहों के अनुसार दक्षिणायण से लेकर उत्तारायण (छः महीने) तक रात का समय है और इसी तरह उत्तारायण से दक्षिणायण तक दिन का समय है।

यह ठीक हमारी पृथ्वी की तरह है जिसमें शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक रात है और सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक दिन है।

4. इसके साथ,आज ही दिन और रात दोनों समान और सटीक समय के होंगे।

अर्थात, पृथ्वी का दिन का समय पृथ्वी के रात के समय के बराबर होती है। दिन का समय = रात का समय।

यहाँ एक और बहुत ही महत्वपूर्ण बात यह है कि आदि काल (अज्ञात समय) से पहले से ही हम श्री सूर्य देव के चलन के बारे में जानते थे। 

आदि / अज्ञात समय से भारत ने हमेशा दुनिया को सबसे श्रेष्ठ वैज्ञानिकों को प्रदान किया है। हम युगों से विमान / हवाई जहाज में चलते रहे हैं। हम युगों से ही विभिन्न ग्रहों को जानते हैं।

अभी हाल ही में यूरोपवालों ने इन चीज़ों के बारे में पता किया हैं |

विज्ञान और तंत्रज्ञान (टेक्नोलॉजी) में आगे कौन है आप ही सोचिए ??? 

सभी को मकर संक्रांति / संक्रमण का शुभाशय 

हमें हमारा देश, संस्कृति और सनातन धर्म के बारे में बहुत अधिक आदर और गर्व होना चाहिए |

इस का अंग्रेजी का अनुवाद पढ़ने के लिए, यह लिंक पर क्लिक करें |

Makara Sankranti unknown facts

इस का कन्नड़ का अनुवाद पढ़ने के लिए, यह लिंक पर क्लिक करें |

ಮಕರ ಸಂಕ್ರಾಂತಿ ಹಬ್ಬದ ಮಹತ್ವ

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