हिंदू (युगादी) और रोमन नए साल (नव वर्ष) का संबंध

हिंदू (युगादी) और रोमन नए साल (नव वर्ष) का संबंध

हिंदू (युगादी) और रोमन नए साल (नव वर्ष) का संबंध जब हम कुछ सब्जियां या फल खरीदने की कोशिश करते हैं, तो हम इसके बारे में सभी प्रकार के संशोधन करते हैं। हम हमेशा देखते हैं कि सब्जी या फल ताजा है या नहीं। वो किसी भी जीवाणु द्वारा दूषित किया गया है या नहीं। यह किसी कीड़े से प्रभावित हुआ है या नहीं। हम सभी प्रकार के जासूसी कार्य करते हैं। इसके अलावा अगर हमें अपने बच्चे को एक स्कूल में दाखिल करन है, तो हम अपने सभी पड़ोसियों, अपने दोस्तों, अपने रिश्तेदारों से अलग-अलग स्कूलों के बारे में पूछते हैं।   भारी शोध करने के बाद हमने अपने बच्चों को सम्भावनीय सबसे अच्छे स्कूल में डाल दिया। इसी तरह अगर हमें अपने स्वास्थ्य के बारे में राय लेने की जरूरत है तो हम निजी स्वास्थ्य क्लीनिकों / अस्पतालों में सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों के पास जाना पसंद करते हैं। हम अपने कई दोस्तों, रिश्तेदारों आदि से उस विशेष अस्पताल और डॉक्टर के बारे में पूछताछ करते...
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सनातन धर्म कब शुरू हुआ है?

सनातन धर्म कब शुरू हुआ है?

सनातन धर्म कब शुरू हुआ है? नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण जी कि आशीर्वाद आप पे और आप के परिवार पर सदा रहे ! सनातन धर्म का अर्थ - सनातन = जो कभीभी अनाथ नही होसकहेगा. जो आदि काल से है, उससे सनातन कहते हैं। धर्म का अर्थ इस, जो भगवान विष्णु जी ने कहा है, जो नियम उनोने बनाया है, उससे धर्म कहते हैं। भगवान विष्णु के अवतार भगवान कृष्णा ने जोभी नियम बनाया है, उस नियम को हम सभ मिलकर पालन करना चाहिहै। चलिए, अब हम "सनातन धर्म कब से शुरू हुआ है?" इसके बारे मे सीकते हैं। श्री हरी के अनंत अवतारों में, श्री बुद्ध के अवतार हो कर ३,००० वर्ष हुए है | श्री कृष्ण के अवतार हो कर ५,००० वर्ष से अधिक समय हुआ है | श्री राम के अवतार हो कर ८,६९,००० वर्ष हुए है | इसी तरह, श्री हरी के अन्य अवतार जैसे, मत्स्य, कूर्मा, वाराह, नरसिम्हा आदि अवतार हो कर ३८,९३,००० वर्ष के आस पास हुए है | एक कलि युग, ४,३२,००० वर्षों का होता है | एक द्वापर युग, ४,३२,००० * २ = ८,६४,००० वर्षों का होता है | एक त्रेतायुग, ४,३२,००० * ३...
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हमें भगवद गीता क्यों पढ़ना चाहिए (भगवद गीता पढ़ने का महत्व क्या है)

हमें भगवद गीता क्यों पढ़ना चाहिए (भगवद गीता पढ़ने का महत्व क्या है)

हमें भगवद गीता क्यों पढ़ना चाहिए (भगवद गीता पढ़ने का महत्व क्या है) नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण जी कि आशीर्वाद आप पे और आप के परिवार पर सदा रहे ! यह समझने के लिए कि हमें श्री भगवद गीता क्यों पढ़ना चाहिए, आइए हम अपने महान पुराणों में से एक सुंदर उदाहरण पर विचार करें: एक बार एक बूढ़े व्यक्ति का पोता भगवद गीता पढ़ रहा था। लेकिन जितनी बार उसने भगवद गीता पढ़ी, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था और इसलिए वह अपने दादाजी के पास गया और उनसे कहा कि, कुछ दिनों से मैं भगवद गीता पढ़ने की कोशिश कर रहा हूं, लेकिन मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा हूं।  दादाजी ने बच्चे को एक कोयले की टोकरी लेने और उसका उपयोग करके नदी से पानी लाने के लिए कहा। भगवान श्री कृष्णा, अर्जुन को श्री भगवद गीता का उपदेश दे रहे हैं | मासूम बच्चा नदी की तरफ भागा और कोयले की टोकरी में पानी लाया। लेकिन जैसे ही...
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मकर संक्रांति का महत्व (Unknown facts about Makar Sankranti in Hindi)

मकर संक्रांति का महत्व (Unknown facts about Makar Sankranti in Hindi)

मकर संक्रांति का महत्व (Unknown facts about Makar Sankranti in Hindi) नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री सूर्यनारायण कि आशीर्वाद आप पे सदा रहे! मकर संक्रांति: आइए, सबसे पहले हम समझते हैं कि 'मकर संक्रांति' शब्द का अर्थ क्या है।   'मकर', 'राशियों' में से एक है और 'संक्रांति या संक्रमण' का अर्थ है श्री सूर्य देव का चलन। अर्थात श्री सूर्य देव 'धनुर राशी' से 'मकर राशी' में प्रवेश करते इसको संक्रमण कहते हैं।  यहां संक्रांति / संक्रमण का अर्थ है एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना । संक्रमण = सं + क्रमण। यहां क्रमण का अर्थ है चलन। अगर धनुर राशी से मकर राशी में प्रवेश होने का सूर्य देव का यह कार्य, यदि सूर्योदय के समय पर नहीं होता है, तो इसे मकर संक्रांति का उत्सव नहीं माना जाना चाहिए। श्री सूर्य देव उनके सारथी अरुण के साथ | जिस दिन श्री सूर्य देव धनुर राशी से मकर राशी में प्रवेश करते हैं, उस दिन यदि यह चलन भारतीय पंचांग के अनुसार 'सूर्योदय' के समय पर नहीं होता है तो, हम इसे उत्सव के दिन के रूप में नहीं मान सकते।  भारतीय संस्कार के...
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क्या लक्ष्मी देवी भी ब्रह्मा और इंद्र की तरह बदलते हैं?

क्या लक्ष्मी देवी भी ब्रह्मा और इंद्र की तरह बदलते हैं?

क्या लक्ष्मी देवी भी ब्रह्मा और इंद्र की तरह बदलते हैं? नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण और लक्ष्मी देवी के आशीर्वाद आप पे सदा रहे! जैसे श्री ब्रह्म देव का पद और इंद्र देव का पद होता है, उस प्रकार लक्ष्मी देवी का पद नहीं होता है। अनंत काल से और अनंत काल तक, श्री हरी की पत्नी केवल एक ही होती है, वह है श्री लक्ष्मी देवी। पद केवल जीवात्माओं को ही दिया जाता है। लक्ष्मी देवी को जीवात्मा के रूप में नहीं माना जाता है। लक्ष्मी देवी चेतना / शक्ति है जो ईशकोटी में स्थित है। जैसे श्री ब्रह्म देव का पद और इंद्र देव का पद होता है, उस प्रकार लक्ष्मी देवी का पद नहीं होता है। अनंत काल से और अनंत काल तक, श्री हरी की पत्नी केवल एक ही होती है, वह है श्री लक्ष्मी देवी। महा लक्ष्मी देवी श्री, भू और दुर्गा जैसी अलग अलग रूप में सर्वोच्च भगवान श्री हरी की सेवा करती हैं। श्री कृष्ण अपने पत्नियों के साथ महा लक्ष्मी देवी...
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द्रौपदी के बारे में वास्तविक तथ्य (द्रौपदी पांच पाण्डवसे क्यों शादी की?)

द्रौपदी के बारे में वास्तविक तथ्य (द्रौपदी पांच पाण्डवसे क्यों शादी की?)

द्रौपदी के बारे में वास्तविक तथ्य (द्रौपदी पांच पाण्डवसे क्यों शादी की?) नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण कि आशीर्वाद आप पे सदा रहे! बहुत से लोग हमारे भगवान, देवतागण, देवीगणों के बारे में बिना कुछ जाने मन चाहे बातें करते हैं |  लेकिन इस प्रकार के लोग कभी यह समझने की कोशिश नहीं करेंगे कि वास्तविक तथ्य क्या हैं? क्योंकि वे केवल कुछ बातें करना चाहते हैं, या कुछ गपशप करना चाहते हैं ताकि वे अपने दोस्तों, परिवार, रिश्तेदारों आदि के साथ अपने जीवन का आनंद ले सकें, लेकिन निश्चित रूप से इन लोगों को उन सभी बातों के लिए भुगतान करना पडेगा। यह बिल्कुल ही सच हैं! ऐसा ही एक बड़ा उदाहरण श्री द्रौपदी देवी के बारे में है। वह भारतीय सनातन धर्म के महत्तम देवीगणों में से एक हैं। आइए, श्री द्रौपदी देवी के कुछ तथ्यों / महानता को समझते हैं। जैसा कि हम में से कई लोग जानते हैं कि पांच पांडवगण श्री युधिष्ठिर, श्री भीम देव, श्री अर्जुन, श्री नकुल और श्री सहदेव, श्री द्रौपदी देवी से विवाह करते हैं। लेकिन यह कैसे संभव है? एक महिला...
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