शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का अर्थ क्या है | Shukla Paksha and Krishna Paksha meaning in Hindi

शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का अर्थ क्या है | Shukla Paksha and Krishna Paksha meaning in Hindi नमस्ते मेरे प्यारे मित्रों, आज आप कैसे हैं? #BhagavanBhakthi वेबसाइट / ब्लॉग में आपका स्वागत है। भगवान श्री विष्णु का आशीर्वाद आपको और आपके परिवार पर सदा रहें! मेरे प्यारे मित्रों, "शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष का अर्थ" के बारे में जानने से पहले, आइए हम हिंदू धर्म (सनातन धर्म) के बारे में थोडा जानकारी पाते है। हिंदू धर्म इस धरती पर सबसे उत्तम धर्म है। हिंदू धर्म कोई रेलिजन नहीं है। हिंदू धर्म को सनातन धर्म कहा जाता है क्योंकि यह "आदि कलाम" (अज्ञात समय सीमा) से भी पहले से मौजूद है और निश्चित रूप से "अनंत कलाम" (अज्ञात अनंत समय सीमा) तक भी रहेगा | इसका अर्थ है सनातन धर्म सनातन, चिरस्थायी, कभी न खत्म होने वाला, अनंत, शाश्वत, अविनाशी, अमर, आदि है। मैं यहां धर्म की बात ही नहीं कर रहा हूं। मैं आपको शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष शब्दों को समझाना चाहता हूं और...
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उपनिषद के नाम (संस्कृत) (संक्षिप्त जानकारी के साथ) | List of Upanishad names in Hindi (Sanskrit) (with basic information)

उपनिषद के नाम (संस्कृत) (संक्षिप्त जानकारी के साथ) | List of Upanishad names in Hindi (Sanskrit) (with basic information) नमस्ते मेरे प्यारे मित्रों, आज आप कैसे हैं? #BhagavanBhakthi वेबसाइट / ब्लॉग में आपका स्वागत है। भगवान श्री विष्णु का आशीर्वाद आपको और आपके परिवार पर सदा रहें! प्रिय मित्रों, उपनिषदों के नामों की सूची जानने से ठीक पहले, आइए हम उन महान और दिव्य उपनिषदों के बारे में संक्षिप्त जानकारी लें। संस्कृत में उपनिषदों को उपनिषद् / ಉಪನಿಷದ್ / upaniṣad के रूप में उच्चारित किया जाता है। उपनिषद हिंदू सनातन धर्म के वैदिक संस्कृत ग्रंथ हैं जो सनातन धर्म (हिंदू धर्म) के आधार की व्याख्या करते हैं। उपनिषद वेदों (हिंदू धर्म का सबसे पुराना ग्रंथ) के मुख्य भाग में से एक हैं। उपनिषदों को आमतौर पर सनातन धर्म (हिंदू धर्म) के अनुसार वेदांत के रूप में जाना जाता है। वेदांत की व्याख्या "अंतिम अध्याय, वेद के कुछ हिस्सों" के रूप में की गई है और वैकल्पिक रूप से "वस्तु, वेद का सर्वोच्च उद्देश्य" के रूप में व्याख्या...
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हिन्दू (धर्म) और हिन्दुत्व (में अंतर) क्या हैं | What is Hinduism and Hindutva difference in Hindi

हिन्दू (धर्म) और हिन्दुत्व (में अंतर) क्या हैं | What is Hinduism and Hindutva difference in Hindi नमस्ते मेरे प्यारे मित्रों, आज आप कैसे हैं? #BhagavanBhakthi वेबसाइट / ब्लॉग में आपका स्वागत है। भगवान श्री विष्णु का आशीर्वाद आपको और आपके परिवार पर सदा रहें! इस वेबसाइट / ब्लॉग में आप हमेशा #हिंदूधर्म #संस्कृत भाषा के बारे में जानेंगे। #हिंदूधर्म #संस्कृत भाषा के बारे में वीडियो देखने के लिए मेरे YouTube चैनल #BhagavanBhakthi को भी सब्सक्राइब करें। "हिन्दू (धर्म) और हिन्दुत्व (में अंतर) क्या हैं | What is Hinduism and Hindutva difference in Hindi" के बारे में जानने के लिए आगे बढ़ने से पहले, आइए कुछ बुनियादी जानकारी जानते हैं। हिंदू (धर्म) (Hinduism) और हिंदुत्व (Hindutva) के अंतर के बारे में जानने से ठीक पहले, आइए हिंदू (धर्म), हिंदुत्व, सनातन धर्म और सनातन धर्मी के बारे में कुछ संक्षिप्त विचार जानते हैं| इस पोस्ट में आप निम्नलिखित जानेंगे: हिन्दू (धर्म) या हिंदुत्व की शुरुआत (आविष्कार) किसने की? हिंदुत्व का सही अर्थ क्या है? हिंदुत्व की विचारधारा क्या...
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Gau (Cow) Pradakshina (Parikrama) ka mahatva in Hindi (गौ (गाय) प्रदक्षिणा (परिक्रमा) का महत्व)

Gau (Cow) Pradakshina (Parikrama) ka mahatva in Hindi (गौ (गाय) प्रदक्षिणा (परिक्रमा) का महत्व) नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण जी कि आशीर्वाद आप पे और आप के परिवार पर सदा रहे ! हिंदू धर्म में गौ माता (गाय) को महान और दिव्य स्थान दिया गया है। गौ (गाय) का दूध हमें दही, मक्खन, घी, छाछ, पनीर, क्रीम, आइसक्रीम और कई अन्य उत्पाद देता है। आधुनिक औद्योगिक प्रक्रियाओं में, दूध का उपयोग कैसिइन, मट्ठा प्रोटीन, लैक्टोज, गाढ़ा दूध, पाउडर दूध और कई अन्य खाद्य योजक और औद्योगिक उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जाता है। वराह पुराण से एक श्लोक लेकर आइए आज जानते हैं कि गौ (गाय) प्रदक्षिणा (परिक्रमण) करने से क्या लाभ होते हैं। भगवान श्री वराह स्वामी या श्री भुवराह स्वामी भगवान श्रीमन नारायण (विष्णु) के अवतार हैं। भगवान श्री वराह स्वामी (श्री भुवराह स्वामी) का भगवान श्रीमन नारायण (विष्णु) से कोई अंतर नहीं है। वे दोनों अलग-अलग अवतारों के साथ एक ही हैं। आओ प्यारे दोस्तों, देखते हैं श्री वराह पुराण के...
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Srimad Bhagavad Gita full lyrics in Sanskrit (Hindi) (श्रीमद भगवद गीता संस्कृत (हिंदी) में)

Srimad Bhagavad Gita full lyrics in Sanskrit (Hindi) (श्रीमद भगवद गीता संस्कृत (हिंदी) में) नमस्ते मित्रो, भगवान श्री कृष्ण आपको और आपके परिवार को सुखी रखे, शुभमस्तु । भगवद गीता न केवल हिंदुओं के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए सबसे दिव्य ग्रंतों में से एक है। महाभारत (कुरुक्षेत्र) युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, भगवान श्री कृष्ण गीता (दिव्य गीत) के रूप में अपने मित्र और महान भक्त अर्जुन को इसका उपदेश देते हैं। लेकिन, हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि भगवान श्री कृष्ण ने केवल अर्जुन को ही महान भगवद गीता का उपदेश नहीं दिया था। नहीं ऐसी बात नहीं है। भगवान श्री कृष्ण ने सभी को और विशेष रूप से कलियुग के लोगों को महान भगवद गीता का उपदेश दिया है, क्योंकि हमारे पास सनातन धर्म का सही ज्ञान नहीं है। इस प्रकार हमें अपने मन में यह रखना चाहिए कि, भगवद गीता पृथ्वी पर सभी प्राणियों की भलाई के लिए है। भगवद गीता = भगवान की + गीता = भगवान श्री...
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संस्कृत में रिश्तों (संबंध) के नाम (Relationship names in Sanskrit (in Hindi)

संस्कृत में रिश्तों (संबंध) के नाम (Relationship names in Sanskrit (in Hindi) नमस्ते मेरे प्यारे मित्रों, आज आप कैसे हैं? #BhagavanBhakthi वेबसाइट / ब्लॉग में आपका स्वागत है। भगवान श्री विष्णु का आशीर्वाद आपको और आपके परिवार पर सदा रहें! इस वेबसाइट / ब्लॉग में आप हमेशा #हिंदूधर्म #संस्कृत भाषा के बारे में जानेंगे। #हिंदूधर्म #संस्कृत भाषा के बारे में वीडियो देखने के लिए मेरे YouTube चैनल #BhagavanBhakthi को भी सब्सक्राइब करें। "संस्कृत में रिश्तों (संबंध) के नाम" के बारे में जानने के लिए आगे बढ़ने से पहले, आइए कुछ बुनियादी जानकारी जानते हैं।     संस्कृत भाषा अद्भुत है। इस तरह की भाषा पूरी दुनिया में मिलेगा नहीं | इसे भगवान की भाषा कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस भाषा को देवलोक मे बोलाजाता हैं | वैकुंठ में, सत्यलोक में, स्वर्गलोक में भी, इस महान भाषा को प्रयोग किया जाता हैं । हमारी संस्कृत भाषा एक विशेष और अद्भुत भाषा है। आइए संभंदों (रिश्तों) को संस्कृत में क्या नाम है करके हम अभी जानेंगे | नीचे संस्कृत...
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एक वृत्त (सर्कल) में 360 डिग्री (360°) क्यों हैं? – केवल 360 डिग्री ही क्यों हैं? | Why are there 360 degrees (360°) in a circle in Hindi

एक वृत्त (सर्कल) में 360 डिग्री (360°) क्यों हैं? – केवल 360 डिग्री ही क्यों हैं? | Why are there 360 degrees (360°) in a circle in Hindi

एक वृत्त (सर्कल) में 360 डिग्री (360°) क्यों हैं? - केवल 360 डिग्री ही क्यों हैं? | Why are there 360 degrees (360°) in a circle in Hindi "एक वृत्त (सर्कल) में 360 डिग्री (360°) क्यों हैं?", इस का अर्थ जानेसे पहले, आइए भारत और भारतीयों के बारे में कुछ संक्षिप्त से जानेंगे। भारत युगो युगों से ज्ञान का केंद्र रहा है। अंतरिक्ष यान (गगन नौका) से जल जहाज (नौका) तक। एयरोस्पेस (आकाशयन) से लेकर अंडरवाटर स्पोर्ट्स (प्लूटाक्रिडा) तक हमने हर चीज में महारत हासिल की थी। यह भारत ही था जिसने न केवल शून्य दिया, बल्कि दुनिया द्वारा उपयोग किए जा रहे सभी नंबर भारत और भारतीयों द्वारा दिए गए हैं। उदाहरण के लिए यदि हम मतगणना प्रणाली से अनजान थे, तो हमारे पास संस्कृत के शब्द कैसे हैं जैसे दशमं (10), शतम (100 - जैसे, शता नामावली), सहस्रम (1000 - जैसे, श्री विष्णु सहस्रनाम), लक्षम (1,00,000) आदि। हम भारतीयों को इस महान देश भारत में जन्म लेने पर बहुत गर्व होना चाहिए। हम...
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(मंदिर में दिया जलाने का और सफाई करने का महत्व) (यज्ञध्वज की कहानी) | Importance of lighting lamp and cleaning in temple in Hindi

(मंदिर में दिया जलाने का और सफाई करने का महत्व) (यज्ञध्वज की कहानी) | Importance of lighting lamp and cleaning in temple in Hindi

(मंदिर में दिया जलाने का और सफाई करने का महत्व) (यज्ञध्वज की कहानी) | Importance of lighting lamp and cleaning in temple in Hindi नमस्ते मित्रो, कैसे हे आप? भगवान श्री कृष्ण जी कि आशीर्वाद आप पे और आप के परिवार पर सदा रहे ! कई वर्ष पहले, यज्ञध्वज नाम के एक महाराजा हुआ करते थे। उनका जन्म चन्द्रवंश में हुआ था। राजा भगवान श्री विष्णु के एक महान भक्त थे। वे विष्णु के सभी मंदिरों को नियमित रूप से सफाई करवाते थे। वे सुनिश्चित करते थे कि रात के समय में मंदिरों में दिए जलाए जाएं। यज्ञध्वज ने रेवा नदी के तट पर विष्णु का मंदिर भी बनवाया था। वहाँ भी, उन्होंने मंदिर में नियमित रूप से सफाई करने का व्यवस्था किया था। और उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि रात के समय में मंदिर में दीप जलाए जाएं। महाराजा के पास विटहोत्र नामक एक पुजारी था। विटहोत्र ने एक बार महाराजा से पूछा, "कृपया मुझे बताएं कि मंदिरों की सफाई और रात में उनमें दीप जलाने के बारे...
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हम नरक जाने से कैसे बच सकते हैं | How can we avoid going to Naraka (hell) in Hindi

हम नरक जाने से कैसे बच सकते हैं | How can we avoid going to Naraka (hell) in Hindi

हम नरक जाने से कैसे बच सकते हैं | How can we avoid going to Naraka (hell) in Hindi नमस्ते मित्रो, कैसे है आप? भगवान श्री विष्णु जी के आशीर्वाद आप और आपके परिवार पर सदा रहे। हम नरक जाने से कैसे बच सकते हैं - चलिए, इस गुप्त विषय के बारे में जानेंगे | मैत्रेय ने एक बार महर्षि पराशर से पूछा कि "मृत्यु के बाद यमलोक जाने से कैसे बचें"। इसके लिए पराशर ने मैत्रेय से कहा कि एक बार नकुल (पंच पांडव में से एक) ने अपने दादा भीष्म से भी यही प्रश्न पूछा था। इस पर भीष्म ने कहा था कि उनके पास कलिंग नामक एक ब्राह्मण मित्र थे और उन्होंने जतिस्मरा ऋषि से भगवान विष्णु को प्रार्थना करने द्वारा यमलोका जाने से बचने का तरीका सीखा था । (जतिस्मरा वो लोग है जो आसानी से अपने पूर्व जीवन के बारे में याद रख सकते हैं। यहाँ जति का अर्थ हैं पूर्व जीवन और स्मरा का अर्थ हैं स्मरण या याद रखना। इस...
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हिंदू धर्म में वास्तविक भगवान कौन है | हिन्दू धर्म में एक भगवान है की अनेक भगवान है? | Who is the real god in Hinduism in Hindi

हिंदू धर्म में वास्तविक भगवान कौन है | हिन्दू धर्म में एक भगवान है की अनेक भगवान है? | Who is the real god in Hinduism in Hindi

हिंदू धर्म में वास्तविक भगवान कौन है | हिन्दू धर्म में एक भगवान है की अनेक भगवान है? | Who is the real god in Hinduism in Hindi हिंदू धर्म में अनुक्रम के बारे में जानने के लिए, हमें पता होना चाहिए कि भगवान और देवताओं के बीच में क्या अंतर है।  भगवान अलग हैं और देवता अलग हैं। भगवान एक हैं, लेकिन देवता कई हैं। देवताओं के सहित, सभी पूरी तरह से भगवान पर निर्भर हैं। दुनिया भर में कई लोग सोचते हैं कि सभी हिंदू भगवान समान हैं। कई लोग कहते हैं कि हिंदू धर्म में कोटि कोटि देवताएं (करोड़ों देवता) हैं। कई लोग सोचते हैं कि श्री रुद्र देव / श्री शिव, श्री हरी के समान हैं। यह चित्र स्पष्ट रूप से दिखाता है कि श्री हरी सर्वोच्च हैं, परम हैं, वास्तविक भगवान हैं और अन्य सभी केवल श्री विष्णु के अनुयायी हैं | कई लोग सोचते हैं कि श्री शिव कोई और नहीं बल्कि श्री विष्णु हैं। कई ने लिखा है कि श्री रुद्र देव, श्री हनुमान के समान हैं, अर्थात श्री हनुमान श्री शिव...
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